भारतीय संगीत एवं प्रस्तुति कला शाखा
अनुभवी कलाकारों एवं उभरते संगीत-प्रेमियों को exposure, अनुसंधान तथा विकास के अवसर उपलब्ध कराते हुए, कलाकारों के परस्पर सहयोग द्वारा नाद सिंधु भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा उससे संबद्ध बिरादरी को सुदृढ़ बनाने का लक्ष्य रखता है।
"संगीत केवल एक कला-रूप नहीं, यह आंतरिक सामंजस्य की एक पवित्र अभिव्यक्ति है। नाद सिंधु के माध्यम से हम अनुभवी एवं उभरते दोनों प्रकार के कलाकारों को exposure, अनुसंधान तथा सार्थक विकास प्रदान करने का प्रयास करते हैं। अनुभवी संगीतज्ञों तथा उत्साही नवोदितों के परस्पर सहयोग को पोषित कर हम भारतीय शास्त्रीय संगीत की कालजयी विरासत को सुदृढ़ करना तथा उसकी जीवंत परंपरा को समृद्ध करना चाहते हैं।"
पं. मुकुंद क्षीरसागर
निदेशक · चैतन्य नाद सिंधु · चैतन्य मिशन ट्रस्ट, जोधपुर

परिचय
भारतीय शास्त्रीय संगीत की ग्वालियर एवं मेवाती घरानों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि, पंडित मुकुंद क्षीरसागर अपने पूज्य गुरुओं — पंडित बी. एन. क्षीरसागर, संगीत मार्तंड पंडित जसराज तथा पंडित यशवंत क्षीरसागर — की समृद्ध संगीत विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत की सात दशकों से अधिक की समर्पित सेवा के साथ उन्होंने विश्व के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुतियाँ दी हैं तथा अटूट निष्ठा एवं भक्ति के साथ संगीत बिरादरी की सेवा की है।
स्वामी ॐ चैतन्य से प्रेरित होकर, पंडित मुकुंद क्षीरसागर आश्रम के साधकों का मार्गदर्शन भी कर रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा प्रस्तुति कला के संरक्षण, संवर्धन एवं उन्नयन हेतु एक विश्व-स्तरीय संस्था की स्थापना की जा सके।
हम सभी पीढ़ियों के कलाकारों को — नवोदित साधकों से लेकर आदरणीय पुरोधाओं तक — भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा प्रस्तुति कलाओं की कालजयी विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु आमंत्रित करते हैं। आइए, मिलकर इस पावन दृष्टि को नए शिखरों तक ले चलें।
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